उत्तराखंड की सीमा पर स्थित ग्राम डिबडिबा का वातावरण उस समय पूरी तरह राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया, जब क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान भानु प्रताप पब्लिक स्कूल में 77वें गणतंत्र दिवस का भव्य आयोजन किया गया। यह केवल एक औपचारिक समारोह नहीं था, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक जड़ों को और गहरा करने का एक संकल्प था। विद्यालय परिसर तिरंगे की आन-बान और शान से सराबोर दिखा, जहाँ छात्र, शिक्षक और समस्त कर्मचारी एक अटूट एकता के सूत्र में बंधे नजर आए। इस पावन अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायकों और भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीम राव अंबेडकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत उस गौरवशाली अनुभूति के साथ हुई, जो भारत के जीवंत लोकतंत्र और स्वतंत्रता की लंबी लड़ाई की याद दिलाती है।

प्रधानाचार्य का आह्वान: कर्तव्यों की राह से ही बनेगा सशक्त भारत

संस्थान के प्रधानाचार्य महेश चन्द्रा ने अपने संबोधन से कार्यक्रम में वैचारिक ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से संविधान की बारीकियों को समझाते हुए बताया कि संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हमारे कर्तव्यों की मार्गदर्शिका भी है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि एक राष्ट्र तभी मजबूत और एकजुट हो सकता है जब उसका प्रत्येक नागरिक ईमानदारी, नैतिकता और जिम्मेदारी के साथ अपने नागरिक धर्म का पालन करें। उनके शब्दों ने उपस्थित छात्र-छात्राओं के भीतर एक अनुशासित और मूल्य-आधारित जीवन जीने की प्रेरणा जगाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाली पीढ़ी ही देश की प्रगति की असली संवाहक है और उनका चरित्र निर्माण ही राष्ट्र का भविष्य तय करेगा।

नन्हे कदमों की थाप और सांस्कृतिक वैभव की प्रस्तुति

समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने देशभक्ति के उत्साह को चरम पर पहुँचा दिया। कक्षा 2 और 3 के नन्हे बच्चों ने जब मंच पर अपनी मासूमियत और ऊर्जा के साथ देशभक्ति नृत्य प्रस्तुत किया, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं, कक्षा 9 की छात्राओं ने अपने आत्मविश्वास और सधे हुए तालमेल से एक शक्तिशाली नृत्य प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह प्रदर्शन केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि यह नारी शक्ति और युवा भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक था। छात्रों की इन प्रस्तुतियों ने दिखा दिया कि कला के माध्यम से राष्ट्र के प्रति प्रेम को कितनी खूबसूरती से अभिव्यक्त किया जा सकता है।

वैचारिक संवाद और शिक्षकों का प्रेरणादायी मार्गदर्शन

बौद्धिक स्तर पर इस कार्यक्रम को जीविका चंद्र, अराना, श्रेया, मोहसिन और नज़राना जैसे प्रतिभाशाली छात्रों के ओजस्वी भाषणों ने और भी समृद्ध बनाया। इन छात्रों ने बड़ी ही स्पष्टता के साथ गणतंत्र दिवस की प्रासंगिकता और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को साझा किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन कक्षा 10 की इशिका और अक्षिता चंद्र ने किया, जिनकी मेजबानी ने दर्शकों को अंत तक बाँधे रखा। संगीत के क्षेत्र में दया राम सर और आरती मैम ने अपने सुरों से समां बांध दिया। उनके द्वारा गाए गए भावपूर्ण देशभक्ति गीत ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। वहीं, मनीषा मैम ने अपने सार्थक संदेश के जरिए छात्रों को सत्य, एकता और उत्तरदायित्व के मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया।


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समर्पण और साझा संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन

इस भव्य आयोजन की सफलता के पीछे स्कूल कोऑर्डिनेटर नेहा मैम और समर्पित शिक्षक टीम का विशेष योगदान रहा। कोमल गुप्ता, ज्योति, अखिलेश, अक्षय, महिपाल और रजनेश सहित सभी स्टाफ सदस्यों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। यह समारोह केवल एक उत्सव मात्र बनकर नहीं रह गया, बल्कि इसने छात्रों के भीतर संविधान के आदर्शों को जीवित रखने की नई चेतना पैदा की। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र की प्रगति के लिए मिलकर काम करने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ। भानु प्रताप पब्लिक स्कूल ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि वह केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए संस्कारित नागरिक भी तैयार कर रहा है।

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