भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा मुस्तफ़िज़ुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) की टीम से बाहर करने के निर्देश ने एक ऐसे विवाद को जन्म दे दिया है जिसकी गूँज अब खेल के मैदान से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों तक पहुँच गई है। बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए इस फैसले को सही ठहराया है, जिसके तुरंत बाद केकेआर ने अपने इस प्रमुख खिलाड़ी को रिलीज कर दिया। इस फैसले को भारत में कुछ संगठनों के दबाव के तौर पर देखा जा रहा है, जिन्होंने मुस्तफ़िज़ुर को टीम में रखने पर शाहरुख खान के प्रति नाराजगी जाहिर की थी। भाजपा नेता संगीत सोम ने इसे देश के हिंदुओं की जीत बताकर इस विवाद को और हवा दे दी है।
बांग्लादेश का तीखा पलटवार और आईपीएल पर प्रतिबंध की मांग
इस घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। बांग्लादेश के खेल मंत्रालय के सलाहकार आसिफ नज़रुल ने इसे बांग्लादेशी क्रिकेट और राष्ट्र का अपमान करार दिया है। उन्होंने भारत के इस कदम की न केवल निंदा की है बल्कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय से अनुरोध किया है कि बांग्लादेश में आईपीएल के मैचों का सीधा प्रसारण तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। नज़रुल का यह बयान साफ तौर पर संकेत देता है कि बांग्लादेश अब खेल के मोर्चे पर भारत के सामने झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि गुलामी के दिन बीत चुके हैं और आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा।
वर्ल्ड कप की सुरक्षा पर सवाल और वेन्यू बदलने की चुनौती
मुस्तफ़िज़ुर विवाद ने अगले महीने फरवरी में होने वाले टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। आसिफ नज़रुल ने बीसीसीआई के रवैये को देखते हुए भारतीय सरजमीं पर बांग्लादेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे आईसीसी से संपर्क करें और बांग्लादेश के हिस्से के मैचों को भारत से हटाकर श्रीलंका स्थानांतरित करने की मांग करें। यह मांग आईसीसी के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकती है क्योंकि भारत और श्रीलंका इस टूर्नामेंट के संयुक्त मेजबान हैं। यदि बांग्लादेश सुरक्षा कारणों से भारत आने से इनकार करता है, तो यह टूर्नामेंट के सफल आयोजन पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।
भारतीय बुद्धिजीवियों और राजनेताओं के बीच मतभेद
बीसीसीआई के इस फैसले ने भारत के भीतर भी वैचारिक दरार पैदा कर दी है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस पर दुख जताते हुए कहा कि खेल को राजनीतिक तनाव की वेदी पर नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। वहीं मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने इसे एक अदूरदर्शी फैसला करार दिया है। गुहा का मानना है कि इस तरह के कदमों से बांग्लादेश की सहानुभूति पाकिस्तान की ओर बढ़ सकती है, जो भारत के रणनीतिक हितों के लिए नुकसानदेह साबित होगा। हालांकि सत्ता पक्ष के कुछ नेता इसे राष्ट्रहित में लिया गया फैसला बता रहे हैं। फिलहाल इस विवाद ने क्रिकेट की दुनिया में एक ऐसी लकीर खींच दी है, जिसे मिटाना आने वाले समय में दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड्स के लिए आसान नहीं होगा।
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