राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट के पास इंसाफ की गुहार लगा रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता पर गुरुवार सुबह खाकी का डंडा चला। अपनी बेटी के हत्यारों के पीछे छिपे कथित ‘वीआईपी’ के चेहरे को बेनकाब करने की मांग को लेकर दोनों बुधवार से धरने पर जमे थे। गुरुवार तड़के करीब चार बजे दिल्ली पुलिस भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंची और प्रदर्शन कर रहे माता-पिता समेत कई समर्थकों व कांग्रेस नेताओं को जबरन गाड़ियों में भरकर थाने ले गई। पुलिस ने सभी को तिलक मार्ग थाने में रखा और करीब एक घंटे बाद रिहा कर दिया। सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई के बाद से सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है। इससे पहले बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी धरना स्थल पहुंचे थे और परिवार से मिलकर उनकी मांगों का खुला समर्थन किया था।
अंकिता भंडारी के माता-पिता को धरने से उठाकर डिटेन करती दिल्ली पुलिस
धरने की असली वजह
अंकिता के परिवार का कहना है कि जब तक पूरे मामले की सीबीआई जांच मुकम्मल नहीं हो जाती और कथित वीआईपी की सच्चाई सामने नहीं आ जाती, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। परिवार का सीधा आरोप है कि इस हत्याकांड के तार जिन नामों से जुड़ रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अंकिता के परिजनों ने दुष्यंत गौतम का नाम लेते हुए मांग उठाई है कि जब तक जांच पूरी न हो, तब तक उनकी सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। 12 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन से उनकी नियुक्ति का आदेश जारी हुआ था, जिसके बाद से ही परिजनों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। हालांकि दुष्यंत गौतम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इस पूरे मामले में पुलिस रिकॉर्ड में उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है।
अधूरे इंसाफ की लड़ाई
ऋषिकेश के वनंत्रा रिजॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करने वाली 19 साल की अंकिता की सितंबर 2022 में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। कई दिनों की तलाश के बाद उसका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। इस वारदात ने पूरे उत्तराखंड समेत पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने मई 2025 में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजे जाने के बाद भी परिवार का दर्द कम नहीं हुआ, क्योंकि रिजॉर्ट में आने वाले जिस ‘वीआईपी’ को स्पेशल सर्विस देने का दबाव अंकिता पर बनाया जा रहा था, उस चेहरे से पर्दा उठना बाकी है। इसी पहलू की पड़ताल के लिए उत्तराखंड सरकार की सिफारिश पर सीबीआई जांच चल रही है और माता-पिता का कहना है कि बेटी को पूरा इंसाफ दिलाए बिना वे चुप नहीं बैठेंगे।
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