राजधानी दिल्ली आज सुबह से ही एक बड़े सियासी अखाड़े में तब्दील हो चुकी है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आज जंतर-मंतर पर देशव्यापी महा-प्रदर्शन का बिगुल फूंका था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को हरी झंडी नहीं दी थी, लेकिन इसके बावजूद देश के कोने-कोने से हजारों प्रदर्शनकारी और विपक्ष के शीर्ष नेता दिल्ली की तरफ कूच करने लगे। कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी है। पूरी दिल्ली को किले में बदल दिया गया है, जहां 20 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। सुबह से ही रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, मेट्रो स्टेशनों और हवाई अड्डे पर भारी पुलिस बल मुस्तैद है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए एहतियातन धरपकड़ की ऐसी कार्रवाई शुरू की, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब तक विपक्षी दलों के बड़े नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और आम कार्यकर्ताओं समेत करीब 1500 से ज्यादा लोगों को पुलिस बसों में भरकर हिरासत में ले चुकी है।

ममता बनर्जी समेत अन्य को डिटेन कर ले जाती पुलिस-फ़ोटो सोशल मीडिया

गुरुग्राम में तड़के पुलिसिया एक्शन
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और सनसनीखेज मोड़ आज तड़के सुबह देखने को मिला। सोशल मीडिया पर करोड़ों की फैन फॉलोइंग रखने वाले मशहूर यूट्यूबर और सरकार के मुखर आलोचक ध्रुव राठी को पुलिस ने उनके घर से ही उठा लिया। ध्रुव राठी हाल ही में बेंगलुरु से इस आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दिल्ली में लगाई जा रही पाबंदियों पर तीखे सवाल उठाए थे और लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की हुंकार भरी थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करीब 50 पुलिसकर्मी गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित सेंट्रल पार्क विहार में उनके आवास के बाहर मुस्तैद थे। सुबह करीब पौने आठ बजे जब ध्रुव राठी की मां ने दरवाजा खोला, तो दिल्ली पुलिस की टीम अंदर दाखिल हुई और उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया। ध्रुव राठी को हिरासत में लेकर अज्ञात जगह पर ले जाया गया और बाद में स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया। इंटरनेट पर ध्रुव राठी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने की अफवाहें तेजी से फैलीं, लेकिन पुलिस ने साफ किया कि यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई एक सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई है।

अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह को डिटेन कर ले जाती पुलिस-फ़ोटो सोशल मीडिया

रनवे पर हाई-वोल्टेज ड्रामा
जैसे-जैसे सूरज ऊपर चढ़ा, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारी ड्रामा शुरू हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली आने से पहले केंद्र सरकार को चुनौती दी थी कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएंगे। लेकिन जैसे ही मुंबई से आई फ्लाइट दिल्ली के रनवे पर उतरी, पुलिस के जवान विमान के भीतर दाखिल हो गए। सहमे हुए यात्रियों के बीच से पुलिस ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हंगामा और बढ़ गया। आंदोलन की लीगल हेड रत्ना सिंह और अन्य कार्यकर्ताओं को भी दिल्ली की सड़कों से गाड़ियों में भरकर ले जाया गया। सड़कों पर हर संदिग्ध गाड़ी और बस की तलाशी ली जा रही है। बॉर्डर पर बैरिकेडिंग और कंक्रीट के ब्लॉक लगा दिए गए हैं ताकि कोई भी प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की तरफ कदम न बढ़ा सके।

पत्रकार ज्यां द्रेज को हिरासत में लेती दिल्ली पुलिस-फ़ोटो सोशल मीडिया

सड़कों पर उतरे दिग्गज
यह लड़ाई सिर्फ छात्र और युवा आंदोलन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें देश के सबसे बड़े विपक्षी नेताओं की एंट्री हो गई। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे इस गुस्से को समर्थन देने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद सड़कों पर उतर आए। पुलिस ने सुरक्षा घेरे को तोड़कर आगे बढ़ रहे अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी को भी बीच रास्ते में रोककर अपनी गाड़ी में बिठा लिया और हिरासत में ले लिया। इनके अलावा केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को दिल्ली के केरल हाउस के पास से सुरक्षा बलों ने अपने घेरे में लिया और उन्हें सीधे छत्रसाल स्टेडियम भेज दिया। त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री मानिक सरकार और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास को भी पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। दिल्ली का छत्रसाल स्टेडियम इस समय एक छावनी और अस्थाई जेल की तरह नजर आ रहा है, जहां हिरासत में लिए गए इन तमाम बड़े चेहरों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को एक साथ रखा गया है।

आइसा की नेहा बोरा को डिटेन कर ले जाती पुलिस-फ़ोटो सोशल मीडिया


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किले में तब्दील जंतर-मंतर
जंतर-मंतर की तरफ मार्च करने की कोशिश कर रहे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और एसएफआई के छात्र नेताओं के साथ भी पुलिस की तीखी झड़प देखने को मिली। आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और महासचिव प्रसेनजीत के नेतृत्व में जब छात्रों ने सफदरजंग एयरपोर्ट और आईएनए मार्केट के पास से संसद की तरफ बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए सबको बसों में ठूंस दिया। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव भी इस विरोध का हिस्सा बनने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ा और दोनों को हिरासत में ले लिया गया। इस पूरे बवाल के बीच जंतर-मंतर पर धारा 144 और 163 लागू कर दी गई है और चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि कोई नया संदेश या वीडियो वायरल न हो सके। पूरा इलाका खाली पड़ा है और सिर्फ खाकी वर्दी का पहरा दिखाई दे रहा है।

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