भारतीय क्रिकेट टीम के युवा और प्रतिभाशाली बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अपनी पहली बड़ी सीरीज में प्लेइंग-11 में खेलने के लिए अभी और थोड़ा सब्र करना पड़ सकता है। न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली पांच मैचों की रोमांचक टी20 सीरीज को लेकर टीम के अंदर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन दिग्गज खिलाड़ियों का मानना है कि इस युवा खिलाड़ी को अभी बेंच पर बैठकर सही समय का इंतजार करना होगा। इस मसले पर देश के पूर्व अनुभवी बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा और मौजूदा कप्तान श्रेयस अय्यर दोनों ने खुलकर अपनी बात रखी है और साफ किया है कि फिलहाल टीम की जरूरतें किस तरह की हैं।
टीम संतुलन सबसे बड़ी प्राथमिकता
जियोस्टार पर बातचीत के दौरान चेतेश्वर पुजारा ने साफ शब्दों में समझाया कि न्यूजीलैंड की मुश्किल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में टीम का संतुलन मैदान पर सबसे ज्यादा मायने रखता है। वहां विदेशी दौरों पर अक्सर ज्यादा से ज्यादा ऑलराउंडर्स की जरूरत महसूस होती है, ताकि गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों मोर्चों पर गहराई बनी रहे। ऐसी स्थिति में टॉप ऑर्डर में बहुत सारे बल्लेबाजों को एक साथ फिट करना कप्तान और कोच के लिए मुमकिन नहीं हो पाता। पुजारा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या संजू सैमसन और वैभव दोनों को एक साथ अंतिम ग्यारह में उतारा जा सकता है, और उनका मानना है कि मौजूदा हालात में यह संभव नहीं है। इसलिए वैभव को अभी अपनी बारी आने का इंतजार करना ही होगा, हालांकि उन्हें आगे चलकर पर्याप्त मौके जरूर मिलेंगे।
अभिषेक और संजू का शानदार प्रदर्शन
उधर कप्तान श्रेयस अय्यर भी इस बात को पहले ही बिल्कुल साफ कर चुके हैं कि अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे सलामी बल्लेबाज पिछले कुछ समय से टीम के लिए लगातार रन बना रहे हैं और कई मौकों पर मैच जिताने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। इन खिलाड़ियों का लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करना ही मुख्य वजह है कि वैभव को फिलहाल बाहर बैठना पड़ रहा है। कप्तान के मुताबिक, अगर आगे चलकर किसी खिलाड़ी की फिटनेस में कोई समस्या आती है या मैदान की परिस्थितियों के हिसाब से कोई बदलाव जरूरी होता है, तभी वैभव के नाम पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
संजू के खराब फॉर्म पर पुजारा का समर्थन
संजू सैमसन के हालिया उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन को लेकर उठ रहे सवालों पर भी चेतेश्वर पुजारा ने उनका खुलकर बचाव किया है। पुजारा का कहना है कि टी20 जैसे तेज और छोटे फॉर्मेट में शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के लिए निरंतरता उतनी ज्यादा मायने नहीं रखती जितनी आम लोग सोचते हैं। उनके मुताबिक कोई भी खिलाड़ी कभी पूरी तरह आउट ऑफ फॉर्म नहीं होता, बल्कि इस फॉर्मेट में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव तो खेल का हिस्सा है। एक अच्छी पारी खेलने की देर होती है और खिलाड़ी दोबारा अपनी पुरानी लय में आसानी से वापस लौट आता है।
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