रुद्रपुर/वाशिंगटन, 24 अक्टूबर। प्रेस वार्ता के सीधे मंच पर उस समय जोरदार तकरार छिड़ गई जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के पुराने आरोपों पर पूछे गए सवाल पर बुरी तरह उखड़ गए। मीडिया के सामने खुद का बचाव करने के बजाय ट्रंप सीधे महिला रिपोर्टर पर हमलावर हो गए और सवाल पूछने के तरीके को लेकर सरेआम अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर डाला। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सार्वजनिक होते ही राजनीतिक और मीडिया जगत में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

​आरोपों पर सीधा वार

​एनबीसी न्यूज की महिला पत्रकार ने सीधा सवाल दागते हुए पूछा कि क्या अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों का उनके लिए कोई मतलब नहीं रह गया है और वे लगातार इससे बचते क्यों दिख रहे हैं। पत्रकार के इस सीधे वार ने ट्रंप को असहज कर दिया। वे सवाल पूरा होने तक भी संयम नहीं रख सके और रिपोर्टर को बीच में ही टोकते हुए आवाज नीची रखने का फरमान सुना दिया।

पत्रकार के सवाल पर भड़कते ट्रम्प, वीडियो वायरल


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​पत्रकार पर निजी हमला

​माहौल उस वक्त पूरी तरह गरमा गया जब महिला रिपोर्टर ने बिना झिझके आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए अपना सवाल दोहराने की कोशिश की। ट्रंप ने तुरंत रिपोर्टर का मीडिया संस्थान पूछा और जवाब मिलते ही तीखा हमला बोल दिया। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि क्या यह लड़की बदतमीज है, और फिर सीधे तौर पर रिपोर्टर को 'बेहद घटिया इंसान' कहकर संबोधित कर डाला। प्रेस वार्ता में सरेआम हुई इस बदजुबानी ने कमरे में मौजूद लोगों को सन्न कर दिया।

​सवालों से बचने की कोशिश

​इस पूरी तकरार का वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही जंगल की आग की तरह फैल गया। आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब कोई नेता गंभीर मामलों पर जवाब देने से कतराता है, तो वह सवालों की धार से घबराकर निजी हमलों पर उतर आता है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका तीखे और असहज सवाल पूछने की ही है, लेकिन ट्रंप की इस प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि आरोपों पर घिरते ही वे किस कदर आक्रामक हो जाते हैं।

​पद की मर्यादा तार-तार

​वीडियो सामने आने के बाद दुनिया भर के मीडिया मंचों पर तीखी बहस छिड़ गई है। पत्रकारों और संगठनों ने साफ कहा है कि सार्वजनिक पद पर रहे किसी व्यक्ति द्वारा मीडिया पर इस तरह का निजी हमला कतई बर्दाश्त करने लायक नहीं है। तीखे सवालों से घिरने पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न केवल पद की गरिमा को गिराता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सत्ता और सियासत की गलियों में असहज सच का सामना करने का साहस कितना घटता जा रहा है।

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